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आस्था पर फैसला देने के लिए नहीं बैठा है कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर मामले से जुड़े एक मामले को संविधान की 9 सदस्यीय पीठ को सौंप दिया है। अब अप्रैल में इस मामले की सुनवाई होगी। मामले में देवास्वम बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया है, जिसमें कुछ अहम बातें की गई हैं। बोर्ड ने इसमें सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि के निर्णय का भी हवाला दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में केरल के त्रावणकोर देवास्वामी बोर्ड ने सबरीमाला केस में एक लिखित हलफनामा दिया। इसमें कहा गया है कि कोर्ट में समुदाय की आस्था को बढ़ावा दिया गया है। न्यायालय आस्था पर निर्णय के लिए कोई आपत्ति नहीं है। बोर्ड ने अपना आधा नाम सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि फैसले का भी दिया है। इस मामले को 7 अप्रैल, 2026 से 9 जजों की पीठ ने वापस ले लिया है। संपूर्ण मामले को मूलभूत माना जाता है।

 

  • बोर्ड ने कहा कि इस अधिकार का कोई भी प्रत्यक्ष या आंशिक रूप से नुकसान करने वाले विनाशक द्वारा नियंत्रण और संतुलन की संरचना और कॉम्प्लेक्स सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है…।
  • बोर्ड ने कहा है कि भारत के संविधान के खंड 25 के तहत लोगों के अधिकारों को ‘इस हिस्से के अन्य सदस्यों’ के साथ टुकड़ों में पढ़ा जाना चाहिए और उनके दिए गए अधिकारों के तहत उन्हें जारी किया जाना चाहिए।
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